Tuesday, October 06, 2026

Ghazal

बड़े हैरान हो जी मेरी चालाकियों से 

ये सब चालाकियाँ तुम ही से सीखी हैं। 

 

डोली से उतरी थी सादा दिल गुड्डी

सभी मक्कारियाँ तुम ही से सीखी हैं 


तुम्हीं ने चुप रहना सिखाया है,  

और अय्यारियां तुम ही से सीखी  हैं


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