Friday, September 30, 2022

Two lessons i learnt today

The trigger was someone posting that we are in the stage of reverse victimisation of men. Many men are punished because they are men. 

Then, someone wrote: The same is true of caste issues too. 

I wrote: There is a movement called One Family, One Reservation. This movement says that once a family has availaed of reservation, they should not be able to apply under the quota again. it should pass to another family. 

To which someone wrote: 

sure, we can do that once people stop getting killed for drinking water from the wrong well or growing a moustache. A one time reservation sadly doesn’t solve the entire caste issue.

Now, because caste has not been a factor in my growing up, I remain quiet on these caste related discussions. 

But this comment totally triggered me. 

So, here is the response that I did not put there: 

1. Hate is an end unto itself. Hate just follows the path of least privilege. It can be blacks, women, Dalit. It is a function of power. To consider that you have been singled out for hate is not right. 

2. If reservation has not solved the problem of casteism in 75 years, then it is definitely not the right solution. 

Monday, September 26, 2022

Why I shared Adtiya Tiwari's death

In India, hundreds of people are killed for hate each day. Aditya Tiwari was neither the first, nor the last blameless person to die. The very next day, a girl in Bulandshahr was so tarumatised by the rape and conversion threat that she hanged herself. 

So, why did I specifically share Aditya Tiwari's issue? 

3 things need to change:

1. Juvenile Law - Seriously needs to relook at the way serious criminals use it. There are gangs that use 17 year olds just because they will come under JJA. And these criminals definitely do not belong under JJA.

2. The crime of the silent bystander is as much as that of the perpetrator. Aditya Tiwari refused to be a silent bystander while his fellow student was sexually harassed and paid for it with his life. If the other bystanders had had half the integrity, he would be alive today. Even in death, this boy lives more than those who stood by and watched him being killed.

3. Something gives 15-year-olds the confidence to be this brazen in committing a public crime. Something gives them the feeling of entitlement to first sexually harass a young schoolgirl, and then to violently kill the person who opposes such behavior. Wherever that messaging is coming from - that the law will not catch up with you, or that you can do this and get away with it - that messaging needs to be systematically uprooted. Instead of showing what the criminals did, show where they ended up, and how fast. Don't show the picture of the Bulandshahr girl hanging from a rope. Show pictures of the boys in jail. Show pictures of the perpetrators in police vans, going to their court cases and getting no bail. Let the headlines scream - Bail Denied. Let the Headlines Scream - Life Sentence for 16 year old murderer.

Aditya Tiwari of Village Jalalpur, Bihar


This young boy was a student at Chhapra High School at Jalalpur. Some Muslim boys were sexually harassing a young girl. He protested against that treatment. 

The boy on the right is either called Asif, Saif, Arsha, Shahid, or some such name. He put his status 2 hours before the brutal murder - Aaj Jalalpur me Khele hoe. That brazenly he planned the kill. 

These boys surrounded Aditya Tiwari and stabbed his repeatedly till he died. This is Aditya Tiwari after the stabbing. 

This is a 15 year old who died because he protested sexual harassment. By boys who knew they will get away with it. 

Look at these pictures carefully. In death, Aditya Tiwari lives more than the bystanders who did not intervene when he was being stabbed. 
In death, he lives more than the policemen who are trying to hush up the case. 

In death, this boy lives. Even when breathing, those people are dead. 

But the most alive is the mentality that believes, honestly, that it can get away with this behaviour. 

Thursday, September 22, 2022

Monday, September 19, 2022


दफ्तर में सजाया जा रहा है 

हमें घर से मिटाया जा रहा है। 

मुहब्बत में सताया जा रहा है 

हमें खुद से बचाया जा रहा है 

दोनों बच्चों की शादी एक ही दिन, 

बहुत पैसा बचाया जा रहा है। 

देवी आहिल्या का मुकदमा


1. This story is based on the original story of Devi Ahilya being cursed by her husband, Rishi Gautam, for her disloyalty. Please read that story for context. 

2. I understand that in some versions of the original story, Devi Ahilya knew that Indra wasn't her husband and was complicit in the act. However, in the original version that I have read, Devi Ahilya was tricked into believing that it was her husband. I accept this version of the story, simply because if Devi Ahilya was complicit, Indra would not have needed to take another form at all. Also, that was the first version I heard from my family. The second version, of Devi Ahilya being complicit, appears to be of recent origin. 

स्वर्ग में हाहाकार मचा हुआ थाऋषि गौतम ने देवी अहिल्या को श्राप दिया था! किन्तु यह क्या! देवी अहिल्या ने ऋषि गौतम का श्राप लौटा दिया, और अपने पति से मुकदमे की मांग करने लगीं।

“आपने मुझे पवित्र होते हुआ भी श्राप दिया है! इस श्राप को अपनाने का अर्थ है, अपना दोष मान लेना। किन्तु मैं दोषी नहीं हूँ! इसलिए मुझे न्याय चाहिए!”

ऋषि गौतम और देवी आहिल्या के बीच का झगड़ा,वह भी देवराज इंद्र के कारण! त्रिमूर्ति के अलावा उस का निर्णायक कौन हो सकता था? यही निश्चय किया गया कि उस मुकदमे के जज त्रिमूर्ति में से ही एक होंगे।

पहला नाम तो ब्रह्मा जी का ही आया। किन्तु ऋषि गौतम को देवी सरस्वती का स्मरण हो आया और उन्होंने ब्रह्मा जी को जज बनाने का विचार तुरंत छोड़ दिया।

अगला नाम श्री विष्णु का था। जैसे ही वे सब अपना मुकदमा ले कर बैकुंठ पहुंचे, श्री लक्ष्मी देवी ने उन्हें द्वार पर ही रोक लिया। “मेरे पति वैसे ही दुनिया भर के जी जंजालों में फंसे हुए हैं! ब्रह्मा जी बना कर निकल लिए और शिव जी को हर युग में एक बार काम करना होता है। पर ये रोज़  का पालन पोषण, इस में कितना समय लगता है, कितनी मेहनत करनी पड़ती है, किसी ने सोचा है!? 2 पल का समय नहीं मिलता हम पति पत्नी को साथ में बैठने का! शिव और पार्वती जी तो धरती भ्रमण को भी साथ ही जाते हैं, पर इनके और मेरे तो भक्त भी same नहीं हैं! इनको अलग प्रार्थना की कॉल पर जाना पड़ता है और मुझे अलग! तरस गई मैं साथ में बैठ कर एक समय का भोजन करने को! खबरदार जो उन्हें एक पल का भी काम और देने की सोची! वैसे भी, धरती के संविधान में अब Executive और Judiciary का काम एक ही संस्था को नहीं दे सकते। वैकुंठ का ऑफिस केवल Executive है, हमें Judiciary चलाने का अधिकार नहीं है। आप लोग अपना झगड़ा ले कर कहीं और जाइए!”


अब तीसरा नाम शिव का ही हो सकता था। यह प्रस्ताव देवी आहिल्या को विशेषकर अच्छा लगा। उन्होंने कहा, “शिव तो हैं ही एक पत्नी धारी। उन्होंने माँ पार्वती के देह छोड़ने के बाद भी, उनके अगले जन्म की प्रतीक्षा की। और कोई विवाह नहीं किया। ऐसी ही निष्ठा मेरी भी मेरे पति के प्रति है। शिव ही श्रेष्ठ रहेंगे। निष्ठा और loyalty की पहचान शिव से अच्छी कौन कर सकता है?”

बात सभी को जंच गई।

शिव की अदालत में मुकदमा शुरू हुआ।

गौतम ने पहले अपनी बात रखी – मेरी पत्नी सती है। इसे अपनी योगिक शक्ति से पता चल जाना चाहिए था कि वह पुरुष मैं नहीं, मेरे रूप में इन्द्र है! यदि उसे पता नहीं चला, तो अवश्य ही उसके सतीत्व में कोई खोट है।“

सभा में सब सर हाँ की मुद्रा में हिले। देवी आहिल्या कोई ऐसी वैसी पत्नी नहीं थीं। कितनी विद्या और योग शक्ति थी उनके पास!

अब देवी अहिल्या उठीं।

“मेरे पति का आरोप है, कि मैंने अपनी दिव्य दृष्टि से क्यूँ नहीं देखा कि वे गौतम नहीं, इन्द्र हैं?

मेरा कहना है की यह प्रश्न ही निर्मूल है। मेरे जानने या न जानने से घटनाक्रम पर कोई असर ही नहीं पड़ता । कैसे?

अगर मैं जान भी लेती कि यह व्यक्ति इन्द्र है, तब भी, क्या वह मान जाता कि वह इन्द्र है? वह हठ करता कि वह गौतम ही है। इस हठ के सामने मेरी एक नहीं चलती। आज भी, धरती लोक पर एक ब्याहता पत्नी अपने पति के परिणय निवेदन को अस्वीकार नहीं कर सकती। Marital rape is not a crime on Earth.अगर मैं मना भी करती, और वह बल का प्रयोग करता, क्यूंकि ऐसा हर पति का अधिकार है। “

पार्वती जी और गणिकाएँ यह सुन कर हाँ की मुद्रा में सर हिलाने लगीं।

“पर तुम फिर भी check तो कर सकती थीं?” गौतम अब भी हार मानने को तय्यार नहीं थे।

“पतिदेव, आप, मुझ, और इन्द्र में से, सर्वाधिक मायावी शक्तियां इन्द्र के पास हैं, उस के बाद आप के पास। आप मुझे बताइए – आधी रात को मुर्गा बांग देता है, चाँद अब भी आसमान में है, और आपको कुछ खटकता भी नहीं? मुझ सोई हुई को चेक कर लेना चाहिए था? आपकी दिव्य दृष्टि कहाँ थी?

धरती पर भी एक कहावत है – ज़र, जोरू, और ज़मीन का ध्यान रखना चाहिए। तो आप बताइए, कि आपने अपनी पत्नी की रक्षा क्यूँ नहीं की? आपके सामने लक्षण थे, उन  लक्षणों को आपने अनदेखा किया।  आपकी लापरवाही से मेरे मान की हानी हुई। आपको क्या दंड मिलना चाहिए?”

सभा में चुप्पी छा गई। केवल देवी अहिल्या की आवाज आ रही थी।

“मैं किसी पर पुरुष से संसर्ग करने घर के बाहर नहीं गई। ना ही मैंने आपको छल से कहीं भेज कर पर पुरुष को आमंत्रित किया। आपकी लापरवाही से, आपके घर में, आपके संरक्षण में, मेरे साथ छल हुआ है।

मैंने अपने पति का परिणय निवेदन पाया, और हमेशा की तरह हाँ कर दी।

इन में से आप क्या बदलना चाहेंगे?

क्या हर सती स्त्री अपने पति का परिणय निवेदन पाते ही दिव्य दृष्टि से चेक करे, कि यह व्यक्ति पति है कि नहीं?

या, सती स्त्री को अधिकार है, कि यदि वह शंका में हो तो पति से संसर्ग न करे?”

जैसे ही देवी आहिल्या की बात समाप्त हुई, शिव और पार्वती ने धीरे से एक दूसरे को  देखा और मुस्कुराये।

ऋषि गौतम को परिणाम सुनने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी। पर मुद्दई थे, मुकदमा छोड़ कर भी कैसे भागते?

शिव जी ने देवी अहिल्या से पूछा – “देवी, आपके पति से, अपने घर में, आपके संरक्षण में कमी हुई है। रात्रि के समय वे आपको अकेला छोड़ कर चले गए थे। इसका दंड तो उन्हें दिया जा सकता है, पर पति पत्नी का मामला है, आप लोग आपस में सुलझा भी सकते हो।“

ऋषि गौतम और देवी अहिल्या ने एक दूसरे की ओर देखा, और जैसे Family Court से सफल जोड़े निकलते हैं, दोनों हाथ में हाथ डाले वहाँ से निकले।

Saturday, September 17, 2022

Dedicated to Shopper's Stop, MnS..

 प्यारे Very-Advanced-MNC-Store:

जितनी मेहनत मुझे दिन के 3 "We-are-missing-you-you-haven't-visited-us-in-2 years-7 months-16 days-and-3-hours" वाले CRM Messages भेजने में लगाते हो, उस का दसवां हिस्सा भी अपने in-store staff training पर की होती, तो आज ये दिन न देखना पड़ता।


माफ-करो-पीछा-छोड़ो-गलती-हो-गई-भाई-जान-लोगे-अब? ex customer

महानगर के लोग / Big City People

महानगर के लोग 

गुलाबों जैसे होते हैं 

एक टहनी 

कहीं से भी आ कर 

कहीं भी 

बस थोड़ी सी मिट्टी होनी चाहिए 

और नमी 

उग आती हैं जड़ें 

खिलने लगते हैं फूल

बनने लगते हैं बीज। 

पर गुलाब 

जंगल नहीं बना सकते 

न ही 

वटवृक्ष (बरगद) बन सकते हैं 

कोई लता नहीं रखती अपना सर 

किसी गुलाब के कंधे पर 

कोई अटखेलियाँ करती 

नहीं चढ़ती 

गुलाब के आस पास कोई पौधा उगे तो 

गुलाब के फूल 

रंग खोने लगते हैं । 

गुलाब के पास का हर पौधा 

खर पतवार है (weeds)

जिसे निकालना पड़ता है 

गुलाब के पनपने के लिए। 


ठंडे वतनों का पौधा है। 

सर्द फूल 

100 पौधे क्यारियों में लगे 

हर पौधा एकाकी। 

Big city folks

are like roses 

A stem 

takes root anywhere. 

Flowers come up 

Seeds too. 

But roses 

do not a jungle make 

Nor can they become 

the life preserving 


No creepers rest 

on these branches 

No crawlers climb these arms. 

All plants that grow near a rose 

Become weeds 

for the flowers of rose. 

They must be uprooted

for the roses to bloom. 


is a plant

of cold, cold places. 

A flower 

of cold, cold winters. 

A hundred of them in neat rows

Each one 


Thursday, September 15, 2022

More Quotes and funny one liners.

 All partners in India avoid talking about their abusive spouses. This is called Silence of the Lambs. 

When I tell Alexa to play "Kill me Now" its not a song request, its a vent. 

I want Google to know that i searched for "How to live with a madman" . At least SOMEONE should know I am living with a madman. 

जितनी patience आदमी लोग गोल्फ या billiards table पर दिखाते हैं, उस से आधी भी घर पर दिखाते तो हर घर स्वर्ग होता। 

"तूने अपना रंग चुन लिया?" - The only place where a man will say this? While playing snooker. 

Saturday, September 03, 2022

 "स्त्रियों को सत्ता नहीं देनी चाहिए। 

स्त्रियों को सत्ता का अनुभव बिल्कुल नहीं होता।" 

ये बात एकदम सच है। 

स्त्रियों को सत्ता का अनुभव 

सच में 

नहीं होता। 

For everyone who needs to read this today

When one is invited to be a part of something and one chooses not to participate, post facto, there can be a lot of should've, could've, would've... but the only enduring verb is - didn't.