Wednesday, November 22, 2017

I have learnt that hope can kill you a lot faster than heartbreak can.

Tuesday, November 21, 2017

Katranein: Us din ki baat

 वह: ये  जो हमारे आज, कल और परसों हैं न, ये बदले नहीं जा सकते. 


यह: hmm...  


वह: पर ये जो हमारे सपने हैं न, उन्हें इस आज, कल और परसों से कोई फर्क नहीं पड़ता. बादल की तरह वे इस पूरे धुंए, प्रदूषण, परिस्थिति से ऊपर उड़ जाते हैं. हर इंसान के सपने का बादल, उसके दिल से एक  लम्बे, पतले से तार से जुड़ा होता है. हम बिना किसी तकलीफ  के, दोनों दुनिया में जीते हैं. 


यह: कभी पहाड़ों पर घूमने गयी हो?


वह: हाँ...?


यह: पहाड़ों पर अक्सर बादल हमारे आस पास आ जाते हैं, और पल भर में ही, हम बादल के बीच में होते हैं. एक ही मिनट में, हमारा बादल, हमारा आज, अभी बन जाता है. 


ये जो " आज, अभी" होते हैं न, इन्ही सब को इकठ्ठा कर के बनते हैं, आज, कल, और परसों. 


वह: अच्छा? सच में? आज, कल, और परसों, सिर्फ "अभी, इस पल" का जोड़ है, बस?
इस वाले "अभी" को इकठ्ठा कर लें ?

Dard par 3 laghu kavitaayein

कुछ बातें हमने इस लिए न कीं ,
कि पपड़ी में से रिसने लगेगी पस 
कुछ बातें यूँ न हुईं,
कि कहने की ज़रुरत ही न थी.
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दर्द, दर्द को पहचाने है 
सात समंदर पार
दर्द, दर्द की करे टकोर
कर कर लम्बे हाथ। 


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शब्द बड़े ही बेमानी हैं 
दर्द की भाषा गहरी 
चल सखी,
यहां न पीड़ा बाँचें 
ये सारी दुनिया बहरी। 
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Sunday, November 19, 2017

Sunil Jogi's Children Poetry in Hindi

पढ़ते जाओ, पढ़ते जाओ,
सबसे आगे बढ़ते जाओ 


पढ़ने से ही ज्ञान मिलेगा 
गुरु से विद्यादान मिलेगा 
नए इरादे गढ़ते जाओ 
सब से आगे बढ़ते जाओ 


विद्या तो बेकार न होती 
पढ़े लिखे की हार न होती 
आसमान पर चढ़ते जाओ
सबसे आगे बढ़ते जाओ 


उस दिन जब तुम ज्ञानी होना 
बच्चो मत अभिमानी होना 
अंधकार से लड़ते जाओ 
सब से आगे बढ़ते जाओ
- सुनील जोगी

Saturday, November 18, 2017

Evolution


पहले 
लड़की होती है 
शोख, चंचल,
मन को भाने वाली 


फिर वो बन जाती है 
बद्तमीज़ 
और बहुत 
बदमिजाज़ 


फिर वो बनती है 
धीरे धीरे 
संस्कारी 
के करीब करीब 


इस के बाद वो बनती है 
बीमारू 
गुस्सैल 
जो कभी 
हंसती हुई 
नहीं नज़र आती 


तंग रहता है हर कोई 
उसकी मनगढंत बीमारियों 
और सदा की 
तानाशाही से। 



Maa

अभी मुझे किस बात की चिंता है?
अभी तो मेरी माँ ज़िंदा है..

Monday, November 13, 2017

Sara Shagufta's poem: Shaily ke naam


तुझे जब भी कोई दुःख दे 
उस दुःख का नाम बेटी रखना 

On Sara Shagufta..

किसी  की कहानी जानना,
और उसे उनकी ज़ुबानी सुनना
दो अलग अलग बातें हैं
चाहे कोई लिख कर ही सुनाये,
ये कहानी
सुनी नहीं जाती



Sunday, November 12, 2017

Arsenic

Stay away from this place.

You will not know
Another night of peace
Nor another moment without pain
Your eyes will bear forever
The imprint of that pain
The lines on your face
Will become kinder
Not happier
With time.
Do not enter
This pain.
Its like arsenic.
Only slower.