Monday, September 28, 2026

Book Review: Umr 45 Batlayi Gayi thi उम्र पैंतालीस बतलाई गई थी


 

कहानी या कविता, लेखक/कवि के बच्चे जैसी होती है। किसी के बच्चे की आलोचना करना अच्छा नहीं लगता। अधिकाधिक हम यह कह देते हैं कि हमारे type की किताब नहीं थी। 

कभी यूं भी होता है कि किसी लेखक के नकारात्मक विचार हमारे विचारों से मेल नहीं खाते परंतु हम उन्हें उस लेखक का यथार्थ समझ सकते हैं। 

यह पुस्तक समीक्षा उन दोनों वर्गों में नहीं आती। 

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कहानी के कुछ अनिवार्य तत्व होते हैं - एक नायक, एक खलनायक, कुछ घटनाएँ, अंत में, सभी सिरों को जोड़ता हुआ एक समाधान। 

इस पुस्तक की कहानियों में केवल खलनायक हैं। लोग या तो बुरे हैं या बेचारे। 

चलिए ठीक, नायक, खलनायक न सही। तो कहानी में रह जाती है - घटनाक्रम की रोचकता, भाषा की सुंदरता... 

घटनाक्रम कभी जाम में फांसी गाड़ी की गति से बढ़ता है, कभी लूनी नदी की तरह घुमावदार, किन्तु अंत में रेगिस्तान में ही विलीन होता है - किसी गंतव्य तक नहीं पहुंचता। यह कहा जा सकता है कि रेगिस्तान ही लूनी का गंतव्य है। यह तर्क की दृष्टि से ठीक है, पाठक के अनुभव के लिए सर्वथा निरर्थक। 

रही भाषा की रोचकता, वह यहाँ नहीं है। यदि कुछ रूपक आदि हैं भी तो पुराने। 

इन कहानियों में पढ़ने जैसा कुछ भी नहीं है। न भाषा, न पात्र, न घटनाक्रम। है तो केवल सबके लिए उगले जाने वाला विष। 

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कुछ रचनाएँ बच्चे नहीं होतीं, ना ही किसी का अनुभव/यथार्थ होती हैं। वे बस विष के बीज होती हैं। ये कहानियाँ उस तीसरी श्रेणी की हैं। 












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