Thursday, March 12, 2026

मुझे इश्क है पलाश से

मुझे इश्क है 

पलाश से 

तुम हँसोगे। 

पलाश भी कोई इश्क करने जैसा पेड़ है? 


है। 

सुनो तो। 




पलाश के पत्ते 

और फूल 

कभी साथ नहीं आते 

भरे पूरे पेड़ पर 

एक भी फूल नहीं 

और खड़े ठूंठ पर 

सिर्फ सुर्ख फूल। 

पलाश की किस्मत में वह भी नहीं है, जो हर पेड़ को स्वत: ही मिल जाता है - पत्तों की परवरिश में फूलों का सुख। 

पत्ते फूलों से नहीं मिलते 

फूल पत्तों को नहीं देख पाते 

केवल तना साक्षी है 

कि दोनों का होना सत्य है 

पलाश का तना 

अपने अस्तित्व को 

अपने मन में उठाए चलता है 

आह नहीं भरता 

पलाश 

बाबा सा है 

बच्चों की किच किच 

और माँ की शिकायतों का 

अकेला साझेदार।  



अपने सीने की जलन को 

भरे पूरे वसंत में 

जकरन्दा और गुलाब के समकक्ष 

पुर-गुरूर पहनने से 

नहीं डरता पलाश। 

मुझे 

पलाश सा होना है एक दिन। 



धीरे से 

भीज कर 

या पिस कर 

बन जाता है 

गुलाल 

सब को 

अपना-सा कर जाता है 

 

जा कर 

और भी अपना हो जाता है 

प्रेम सा है 

पलाश 



2 comments:

Anita said...

सुंदर रचना, पलाश को ही टेसू भी कहते हैं और ढाक भी, बड़ा ही अनोखा फूल होता है इसका

How do we know said...

Jee. Thank you so much for liking the piece :)