Friday, April 03, 2026

स्मृति और विस्मृति

 तुम्हारे जाने पर 

मैंने शोक संदेश नहीं लिखा 

न भावभीनी श्रद्धांजलि 

न ज़्यादा गला फाड़ कर रोना 


तुम्हारे तन को 

पवित्र अग्नि को अर्पित किया 

और तुम्हें 

अपने भीतर बिठा कर 

अपने घर ले आई। 

पहले पूजा घर में 

फिर रसोई में 

अब पूरे घर में 

रहते हो तुम, 

पिता। 


मेरे मरने पर 

मेरी मिट्टी को 

अग्नि के सुपुर्द करना

और मुझे  

नदी में बहा आना, 

बेटे। 


2 comments:

Anita said...

वाह! पिता को क़ैद कर लिया और ख़ुद को आज़ाद

How do we know said...

:) Mujhe pita ki zaroorat thi. Koshish hai ki bete ko meri zaroorat na rahe.