Monday, April 20, 2026

Book Review: Tumhaare Baare mein keh raha tha by Amit Goswami

राजपाल प्रकाशन यूं तो हिन्दी के सर्वोत्तम प्रकाशकों में से है, पर पिछले दशक के दौरान नये लेखक वाणी प्रकाशन, पंक्तियाँ प्रकाशन, और कुछ छोटे प्रकाशकों के द्वारा पढ़ने को मिले। 

इसलिए, राजपाल से ये नई किताब देखना अच्छा लगा। 

अमित गोस्वामी सरोद वादक हैं, और कवि भी। यह पूरी पुस्तक प्रेम के बारे में है। 
100 पन्नों की पुस्तक में गज़लें हैं, नज़्में हैं, और कत'आत हैं। 

प्रेम की अभिव्यक्ति यूं भी दुनिया में बुकोव्स्की और इंस्टाग्राम भर में सीमित रह गई है। कुछ आवाज़ें तो चाहिए, जो ओं से अलहदा हों। 
प्रेम है भी ऐसी भावना, जिसके बारे में जितना लिखा जाए कम ही है। 

कुछ चुनिंदा शेर: 

उसे गंवा के कुछ ऐसे जिया हूँ मर मर कर 
कि अब मैं जहर भी पी लूँगा तो मरूँगा नहीं 

लरजते लब पे जो इकरार था, वो और था कुछ 
तुम्हारी आँखों में था इंतज़ार, प्यार न था 

जिसे छूकर हकीकत की तहें खुलने लगी थीं 
कहानी का कोई किरदार होगा, क्या पता था 
** 

रखती है वो गिन कर मेरी ना-करदा खता भी 
कल को कभी झगड़ूँ, तो गिनाने ही में काम आए। 
** 
वो जो बस मेरा था, वो ख्वाब हमारे लिखता 
मेरा बस चलता तो मैं खुद को तुम्हारा लिखता 
*** 
हमको नाहक ही तोड़ कर फेंका 
ज़र्द पत्ते थे, यूं भी झड़ जाते 
******** 
बदन धुआँ था, सो काला लिबास होना था 
उदास दिल था तो चेहरा उदास होना था 
मैं खुद से दूर था, दुनिया भी दूर है मुझसे 
अब ऐसे में तो तुम्हें मेरे पास होना था। 
************ 


 

1 comment:

Anonymous said...

'की जाणां मैं कौण" ब्लॉग लिखने वाले (या वाली)! मैं की जाणां तू कौण?.. पर आप जो भी हैं, बेहद शुक्रिया, इस मुख़्तसर सी तनक़ीद का

अमित गोस्वामी