Tuesday, May 15, 2018

कवि

मुझे लगा था तुम भी कवि हो 
तुम तो यार, सयाने निकले


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2 comments:

Himanshu Tandon said...

आज फिर टपका लहू जिगर से
टटोला तो ज़ख़्म पुराने निकले

हम कहाँ कब, कुछ बोले किसी से
यक आँखों से कई फ़साने निकले

How do we know said...

Hi HT: :) As usual, you work your magic, and how! I can't even dream of taking a post where you take it so naturally.