Thursday, January 02, 2014

2013 - 2014

"वक़्त के गोल पहिये पर
किसी  ने एक जगह
बिंदी लगा दी
तब से हम सब
नया साल मनाते हैं "

शायद पिछले साल ये लिखा था , पर ये कौमी जूनून, अच्छा बहाना है, बैठ कर सोचने के लिये

३६५ दिन बीत गए
एक के बाद एक
पेड़ पौधे ज़िंदा रहे
बच्चे बड़े हो गए
दवाइयां कुछ बढ़ गयीं हमारी
और वक़्त की रफ़्तार
कुछ कम हुई है
खाना खाते हुए
अब अखबार नहीं पढ़ते
पूजा करते हुए
अच्छा लगता है
गहरी सांस और प्राणायाम
अनायास ही हो जाता है।

इस साल हमें पता लगा है
 पुख्ता सबूत के साथ
कि पेड़ हैं हम
धूप और रौशनी न मिले तो
एक दिन में सांस लेना मुश्किल हो जाता है

 बस, यही इस साल का सरमाया
इस साल की बिंदी आने तक
बस यही हो पाया है।

अगले साल का कोई दिशा निर्देश
अभी नहीं बनाया है

 

7 comments:

hitchwriter said...

Happy New Year Howdy! :D

kj said...

I too wishing you a good year ahead

Onkar said...

Beautiful lines

How do we know said...

Hi Hitchie.. HNy to u too!

Hi kj: Thank you, and to u too!

Onkar sir: thank you!

Gentle Breeze said...

Hey HDWK
sahi kaha aapne! Kuch chheezen kam ho gayi hain aur kuch badh gayi hain..agar kuch nahin badla toh woh hai aapka shabdon ko pirone ka andaz! AUR uske hum kaayal hain :)

South Looper said...

अच्छा बहाना है, बैठ कर सोचने के लिये
lovely

also,

इस साल हमें पता लगा है
पुख्ता सबूत के साथ
कि पेड़ हैं हम

lovely!!

How do we know said...

hi GB: thank you! u do make my day !

Hi South Looper: :) yes, that's a fact. I cldnt live indoors for one whole day, it killed me and I finally walked into a room with some light and explained sheepishly - I need the sun to live. :) they nodded in understanding..