Tuesday, January 15, 2013


मुझे जाना था
तुम से दूर
और उस से भी पहले
अपने से दूर
एक दिन
इस मिटटी को बचाने के लिए
एक खुशबू को मैंने गिरवी रखा
और गिरवी रखी चीज़ 
कहाँ वापिस आती है?

आज परदेस में धुल फांकता हूँ
और सोचता हूँ
जिस मिटटी को बचाया था
वो भी सींच कहाँ पाया
और जो खुशबू छूट गयी
उस की भी अब आशा क्या

i needed to go
far away from you
but before that
i had to
leave myself

one day, to save my body
i pawned
the scent of my heart.
and who has ever retrieved
a thing once pawned?

today, as i roam the streets of a land not mine
i wonder
the body that i tried to save
could not be nourished
and my soul
is also
forever starved.