Saturday, December 09, 2023

Silent Conversation/ Shaant Sanvaad

इक बड़े मज़े की बात है, ज़रा सुनियो जी 

मीठे मीठे जज़्बात हैं, ज़रा सुनियो जी! 


तुम देती हो पूरणपोली, मैं खाता मीठी रोटी 

तुम देती हो ताना, मैं पाता प्रेम का बाना

तुम लाज से होतीं गुलाबी, मन हो जाता नवाबी,

बस ऐसे हों दिन रात जी, ज़रा सुनियो जी! 


जब होती कभी लड़ाई, तुम करने लगतीं कढ़ाई 

जब होता प्रेम संवाद, तुम बिछा देतीं अनुराग

सुबह को झिड़की शाम को, मेरी पसंद की साड़ी जी 

बस ऐसे हों तकरार जी, ज़रा सुनियो जी! 


इक बड़े मज़े की बात है, ज़रा सुनियो जी 

मीठे मीठे जज़्बात हैं, ज़रा सुनियो जी! 


This lyrical poem is written in response to a prompt given on a poetry group. The prompt is - Silent Conversation. 

This is a new format for me.  I don't usually write lyrical content that can be recited (not sung) to a meter. 

Only in one place is the meter broken, but I am happy with it. If a better alternative comes to mind later, will change. 




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