Sunday, January 18, 2026

अब मुझ में से नहीं निकलती 

कविता 

कढ़ाई 

या मधुबनी 


कूचियाँ सूख गईं 

धागे उपेक्षित 

कलम ने 

अकेलेपन से आत्महत्या कर ली 

(हम बरसी में नहीं गए ) 


अब मुझ से निकलते हैं 

सफेद, बंजर बादल 

कोयले की राख 

और अफलित टोटके 





No comments: