Thursday, December 25, 2025

कतरन

तुम मुझे समझते क्या हो? 


कोहेनूर। 

तुम, और कोहेनूर, दोनों रोशनी से भरे हो। 

दोनों मेरी किस्मत में नहीं हो। 

1 comment:

Admin said...

ये पंक्तियाँ बहुत कम शब्दों में गहरी चोट करती हैं। तुम तुलना नहीं करते, बस एक सच्चाई रख देते हो। कोहेनूर की चमक और किसी अपने की रोशनी एक साथ याद आती है। किस्मत की बात आते ही दर्द चुपचाप बैठ जाता है।