Thursday, April 02, 2026

Hamaare baare mein

मुझे लगता था तुम आक* हो, और मैं पानी। 

एक को दूसरे को खाली होने तक सींचना होगा, और फिर खाली हाथ वापिस मुड़ जाना होगा।  

पर हम और तुम, धतूरा और आक हैं। साथ में उगते हैं। कोई पालने नहीं आता, पर ज़रूरत के समय हम से लेने में कोई संकोच नहीं करता^। 

ऊपर से देखने पर हम में कोई समानता नहीं है, पर भीतर ही भीतर - जड़ों से और वायु(+) से, हम एक दूसरे का पोषण करते हैं। 

ये कहानी आगे नहीं बढ़ती, हम पर खत्म हो जाती है। पर क्षणभंगुर कहानी को भी होने का अधिकार है। 



RTC: 
+https://www.youtube.com/watch?v=gyOTlBlFEuo

^ धतूरा और आक दोनों शिवरात्रि पर शिव को चढ़ाए जाते हैं। कुछ वैद्य दोनों का उपयोग दावा में करते हैं और कुछ पशुओं के लिए ये खाद्य हैं। इसलिए इन्हें घर पर उगाया नहीं जाता, पोषित नहीं किया जाता, पर इन से लिया जाता है। 

*आक एक खरपतवार (weed) स्वत: उगने वाला पौधा है। इसके पत्ते बकरियों के लिए उत्तम हैं परंतु मनुष्य के लिए ज़हरीले हैं। इसे प्राय: घरों में न उगाया जाता है न उगने दिया जाता है। पौधा बहुत सख्तजान होता है। रेगिस्तान में भी आसानी से उगता और पनपता है। इसलिए राजस्थान जैसे रेतीले क्षेत्रों में बहुधा पाया जाता है।   


On doomscrolling

 Doomscrolling 3 तरह की होती है : 

1. की बनु दुनिया दा? - Worry for the world (war, ecology, ur apocalypse of choice) 

2. मेरा क्या होगा कालिया? - I am doomed. 

3. बाद में? बाद में सिर्फ... - There is no hope anyway. We are all doomed. In the long run, we are all dead. 


So, what's your favourite flavour of doomscrolling? 

1. Pineapple Apocalypse (Stings with every bite but we go on nonetheless) 

2. Syrupy Self doom (Oh, the sweet, sweet taste of self-predicted failure!) 

3. Chocolate No Hope (100% bitter cocoa, and so addictive!)