Tuesday, October 11, 2016

Sohni

मैं ओ सोहनी
जेडी दरिया विच कुद्द पैंदी
पांवे घड़ा होवे
या ना होवे
पालदी
महिवाल नहीं
पूरी चेनाब
मैं दरिया विच तां डुल्दी
क्यूंकि दरिया वगदा !


I am the Sohni
Who jumps into the Chenab
whether or not
she has the floating pot
My objective is not
to meet Mahiwal
I jump into the river
because the river is
and it flows.

3 comments:

Onkar said...

Beautiful lines

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Himanshu Tandon said...

मैं ओ हीर
जेड़ी आप ना
राँझा होई
ना होर थां
परनाई
मैं ना राँझे नू
सांझा कीता
ना जिंद रो - रो
मुकायी

मैं ओ हीर
जेड़ी खुद अपनी
मुर्शिद होई
ते अपनी पाजेब
आप घड़ाई
राँझा मेरे रूह
है वसदा
मैं ना प्रीत लुकायी
मैनू लोड़ नही
रब दी वी हुन
मैं आप
तक़दीर बनाई