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Monday, June 23, 2025

एक प्रेम कथा

ये उस समय की बात है जब तुम और मैं छोटे-छोटे प्रकाश के कण थे। 

प्रकाश पुंज नहीं, सितारे-उल्का तो बिल्कुल भी नहीं। सृष्टि के चेतन होने से पहले के वे प्रकाश कण, जो किसी अदृश्य धुरी के गिर्द चक्कर लगाते थे। 
हमारी नन्ही सी अर्ध-चेतना थी। न उसका कोई व्यक्तित्व था, न उसमें थी निजता। 

हमें एक दूसरे में विलीन होना था, और एक हो जाना था। 
 
चेतना की यात्रा में, विलीनता का आदेश बहुत विरला होता है। दो आत्माएँ साथ-साथ चल सकती हैं, कुछ आदान-प्रदान भी करती हैं, पर विलीनता विलक्षण ही होती है। ये कितना अद्भुत, कितना स्पेशल पल है, हमें इसका ज़रा भी अनुमान न हुआ।   

जाने किस अभिमान में आ कर, हम  दो प्रकाश कणों ने, एक दूसरे में विलीन होने का आदेश ठुकरा दिया। 

तुम और मैं, उस आदेश से बचते, जन्म पर जन्म लेते गए। कुछ एक दूसरे की परिधि में, कुछ उस से बहुत दूर। 
हम शायद प्रकाश कण से चेतन प्राणी बने होंगे, मछली, बगुला, शेर, और बहुत लंबा सफर तय करने के बाद, मानव। 


किन्तु पराचेतना का आदेश केवल आदेश नहीं होता। वह नियति होता है। 

नश्वर जगत के लोग समय को मापते हैं - क्षणों से ले कर सदियों तक। उसी मानक पर समझाऊँ तो, पराचेतना का आदेश वह नियति है जो स्वरूप और सदियों के ऊपर है। उसे आपका यथार्थ बनना ही होता है। आपकी स्वेच्छा पूर्णतया वैकल्पिक है। उसकी इच्छा अनिवार्यता। 


अब हम, फिर से एक दूसरे के सामने हैं। एक ही कमरे में, पर एक दूसरे से कई संसारों की दूरी पर। तुम्हारा भेस, ज़ुबान, देश  - सब अलग हैं। पर इस एक कमरे में, मेरी अर्ध-चेतना ने तुम्हें पहचान लिया है। तुम में विलीन होना मेरी नियति है। मुझ में विलीन होना तुम्हारी। 

अब देखो, तुम्हें समझने में कितना समय लगता है। 

 

Friday, June 20, 2025

माचिस की डिब्बियों जैसे घर

माचिस की डिब्बियों जैसे घरों में 

माचिस की तीलियों जैसे लोग 

एक बार भेजा गरम हुआ तो 

सारा वजूद जल कर राख हो सकता है। 


पर ये लोग 

कुछ पसीने में तर

कुछ शराब में 


वो क्या कहा था गुलज़ार ने? 

सीली तीलियों में आग नहीं लगती*। 


* माचिस फिल्म में एक dialog 




Matchbox houses 

Housing 

Matchstick people 

If the head gets too hot 

everything burns up 


But these people

Some, soaked in sweat 

Others, drowned in drink 


What is it that Gulzar once said? 

Moist matchheads do not catch fire. 


Saturday, April 19, 2025

On romantic love

रूमानी इश्क 8 में से सिर्फ 1 तरह का इश्क होता है 

पर अपने शेरों, किस्सों, कहानियों में, 

हम उसे इकलौता इश्क बना देते हैं। 

इन्द्र है, शिव बना देते हैं। 



Sunday, February 23, 2025

गद्य कविता: ऐसा ही होना

वो ऐसा ही था। 

तुम्हारी आँखों में गहरे देख कर, तुम में तुम्हें ढूंढता था।  

अगर मिल जाओ, तो दोस्ती कर लेता था।  

ना मिलो, तो कभी तकरार नहीं करता था।  

"मरे हुओं से क्या लड़ना?" 


Tuesday, January 28, 2025

Katran

 वो मुझे ऐसे देखता था, जैसे एक मर्द एक औरत को देखता है – हसरत से।

वो मुझ से ऐसे बात करता था, जैसे एक लड़का एक लड़की से बात करता है – हसरत से, पर उस हसरत को पूरा न कर पाने की मजबूरी बातों-बातों में बयान करते हुए। थोड़ा झिझक कर, थोड़ा रुक कर।  

बात पूरी हो जाने के बाद, बस एक छोटे से पल के लिए रुक जाता था।

*********** 

I thought I'd use this as the start of a short story, but the thought is beautiful, and complete enough to live by itself. 

Makes one wonder - gadya mein kitni aisi kavita numa baatein chhipi hoti hain, jinhein ham padhte to hain, par un par gaur nahi karte..


 

Saturday, January 11, 2025

एक तिनके का सफर

कहते हैं कि डूबते को तिनके का सहारा होता है। पर उस तिनके की कहानी तिनका बनने से शुरू नहीं होती। शुरू में वह तना होता है - प्रमुख सहारा। ठीक तने की तरह तन कर खड़ा हुआ। 

फिर उसके पास कुछ वक़्त की कमी होना शुरू हो जाती है, कुछ हम से गलतियाँ होनी शुरू हो जाती हैं - डाल में नामक तेज़, कपड़े ठीक से इस्तरी नहीं, घर आए दोस्त के साथ थोड़ा सा हंसी मज़ाक, उनके हमारी किसी सहेली के साथ फ्लर्ट करने पर हमारा चिढ़ जाना - इन सब बातों से तने का मन हम से उतारने लगता है। इस में तने का कोई दोष नहीं। इस तरह, उदासीनता के मारे, तना टहनी बन जाता है, फिर टहनी से सीख, और इसी तरह घटते प्रेम के साथ साथ, तना भी घाट कर तिनका बन जाता है। 

तब फिर, डूबता इस तिनके का सहारा क्यूँ ले? 

क्यूंकि वह जो तना है न, जो तने से टहनी, टहनी से सींख बना है, वह हमें किसी और का सहारा लेने नहीं देगा। खुद १० मधुशाला लिख आए, हमें झट से याद दिला देगा कि हाला प्रेम में हराम है। 

फिर हमें सिखाया जाता है कि डूबते को तिनके का सहारा। पर किस डूबते को तिनका बचाने आया है? ये पाठ हमें पढ़ाया ही इसलिए जाता है कि जब हम डूब कर मर जाएँ तो कोई ये गिला न कर सके कि तिनके ने बचाया क्यूँ नहीं? न बचाने का सामर्थ्य है न अभिलाषा। जब तुम्हें ये जताया जाने लगे कि तने से तिनका होने का सफर तुम्हारे कारण है, तो यह भी समझ जाना कि तिनका किसी को नहीं बचाता। तिनके को कोई फर्क नहीं पड़ता। तिनके को पता भी नहीं चलता। 


Thursday, June 27, 2024

Lautti baarishein

बारिशें लौट रही हैं 

कोई हाथ थाम कर नहीं कह रहा - रुक जाओ।  


जितनी आतुरता थी आने की 

उतनी ही भेजने की भी है। 


कोई कोस रहा है 

किसी कमरे में, 

"कितना नुक्सान कर दिया!" 


बच्चों की हंसी नहीं रुक रही: 

"पार लग गए ! अब कोई चिंता नहीं! 

बारिश ने सब काम कर दिया!"


माई बाप खुश हैं 

"सबके लिए, 

कितना कुछ लाती हैं , 

जब भी आती हैं ।"


झुलसती गर्मी में 

पींगें पड़वाती हैं  

जब आती हैं ।

  

- बारिशें 

घर की बुआ हों जैसे।  



Saturday, March 16, 2024

इन रंगों को जानते हैं?

इन में से कितने रंग पहचानते हैं आप? 


धानी 

कत्थई   

प्याज़ी 

सुरमई 

फिरोज़ी 

मेहंदी 

तोतिया 

सलेटी 

आसमानी 

सुर्ख 

सिंदूरी 


  Scroll down for answers: 

धानी - Bright green - the colour of the rice crop 

कत्थई   - brown 

प्याज़ी - magenta

सुरमई - dark black 

फिरोज़ी - turquoise 

मेहंदी - Henna 

तोतिया - parrot green

सलेटी - grey 

आसमानी - sky blue 

सुर्ख - blood red 

सिंदूरी - Vermillion red 



Saturday, April 17, 2021

पतियों का महामंत्र

 कहते हैं कि खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता हैये भी कहते हैं कि चिंगारी से चिंगारी जलती हैये उन दोनों में से कौन सा है, पता नहींपर यह लेख नम्रता जी के लेख से सम्मोहित (उफ्फ़!!!! प्रेरित) हो कर के लिखा गया है

पति पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैंवे आपस में सखा, मित्र, आदि भी होते हैंकिन्तु हम, अपने पति की शिष्या होना चाहती हैंउन्हें अपना गुरु बनाना चाहती हैं

क्यूँ?

क्यूंकि हम उनसे एक विशेष जादुई मंत्र सीखना चाहते हैं। 

आइए पहले जानते हैं, इस मंत्र का महात्मय:

 

यह मंत्र ब्रह्मास्त्र की तरह अचूक और घातक हैयह कभी कार्यसिद्धि में विफल नहीं होता

महा मृत्युंजय मंत्र आपकी जान बचाए, उस से पहले आपको उसे २१ बार बांचना होगाकिन्तु यह मंत्र एक ही दिन में २१ बार आपकी जान किसी भी प्रकार के संकट से बचा सकता है

इस चमत्कारी मंत्र का ज्ञान हर बालक को जन्म घुट्टी के समान स्वाभाविक रूप से मिलता है, किन्तु किसी भी कन्या को दहेज के साथ भी बांध कर नहीं दिया जाता

मंत्र के बोल विशिष्ट नहीं हैं, विशेष है, उन्हें प्रयोग करने की विधिहर बार, अचूक तरीके से, यह मंत्र हमारे पति द्वारा प्रयोग किया जाता है, किन्तु आज तक, इसका छोटा सा उपयोग भी हम से सफलता पूर्वक हो पाया

 

तो इसलिए, पति नाम की धूनी रमा कर, हम तपस्या में लीन हैं

 

जब तक हम इस के उपयोग का भेद जान नहीं लेते, यह तपस्या अखंड रहेगी

  

आप सोचते होंगे, क्या है वह मंत्र, और उसका प्रयोग इतना कठिन कैसे हो सकता है

 

तो सुनिए, मंत्र केवल शब्दों का है

 पर इसकी महिमा, इसकी उपलब्धियों का गुणगान, किसी प्रकार संभव नहीं है

 

आप केवल उदाहरण लीजिए

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कार्यालय से फोनपतिदेव : जी सिर, देशों का प्रोजेक्ट, करोड़ का टेन्डरमैंने पहले कभी किया तो नहीं है सर, पर आप चिंता मत कीजिए, मैं १५ दिन में सब काम सीख भी लूँगा, और सम्हाल भी लूँगा

..

इस से पहले.. नहीं सर करोड़ से ऊपर का प्रोजेक्ट किया तो नहीं है, पर आप चिंता कीजिए सर, सब हो जाएगाजी सरआपको भी

 

मिनट बाद हम इन्हीं विद्या विशारद से कहते हैं, “सुनिए जी, ज़रा बर्तन धो देंगे, मुझे छोंक लगाने को चाहिए?”

 

और ये निकला महामंत्र: “मुझे बर्तन धोने कहाँ आते हैं? मुझसे कैसे होगा?”

*****

घर पर शादी हैपतिदेव: माँ, आप चिंता करें, मैं केटरिंग वालों का सब हिसाब किताब देख लूँगासब चीज़ का ध्यान रखूँगा, आटा , चावल, तेल, मजाल है, जो एक भी चीज़ खराब करें!

 

१५ मिनट बाद हम पतिदेव से कहते हैं, “सुनो, ज़रा देखना बच्चे इस साड़ी पर कूदें नहींबड़ी मुश्किल से प्रेस करवाई हैमैं बाल बनवा कर आती हूँ।”

 

मैं? मुझ से कैसे होगा?

***********

 

पार्टी में पतिदेव पास वाली भाभीजी को इम्प्रेस करने के चक्कर में किवदंती सुनाते हैं, “अरे स्कूल में तो मजाल है कभी १०० से नीचे नंबर जाते भाभी जीटीचर तक को खुला चैलेंज दे कर आते थेआधी रात को उठा कर पूछ लीजिए कान्सेप्ट, बिल्कुल सटीक याद रहता था। “

 

अगले दिन उन्हीं पतिदेव से हम: “सुनिए, बिट्टू कब से कह रहा है उसे कम्पाउन्ड इन्ट्रेस्ट समझ नहीं रहाएक बार बैठ कर समझा देंगे आप?”

 

पतिदेव (आश्चर्यचकित): मैं? मुझ से कैसे होगा?

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अब प्रिय बहनों, आपकी धीमी मुस्कान और सहमति में हिलता सर बताते हैं कि यह महामंत्र विश्वव्यापी हैइसके उपयोग अनेकानेक हैंएक बार इसे प्रयोग करने की विधा सीख लेने पर, ऐसा कोई संकट नहीं जिस से बचा जा सके

अत: सखियों, हम अपने पति की शिष्या बनना चाहते हैं।

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विद्या सीख कर करेंगे क्या

बस, जैसे अंडे की टोकरी खरीद कर बच्चों को डांटने का सफर ख्यालीराम जी ने कुछ ही क्षणों में पूरा कर लिया था वैसे ही, लेख लिखते ही हम सोचने लगे, कि इस अचूक विद्या के प्राप्त होने पर हम उसका प्रयोग किस प्रकार करेंगे

ये देखिए:

१.  पति: सुनती हो, आज मां और दीदी आएंगे, उन्हें ज़रा शॉपिंग कराने ले जाना प्लीज  और देखो, पैसे उन्हें मत देने देनासब जगह तुम्हीं देना

हम (बड़ी-बड़ी आँखें और बड़ी खोल कर): मैं? मुझ से कैसे होगा?

 

२.  पति: सुनती हो, आज आते हुए, बाजार से ज़रा ये सब समान ले आना

हम : मैं? मैं घर छोड़ कर कैसे जाऊँगी? मुझ से कैसे होगा?

 

३.  सुनो, इस बार की घर की किस्त तुम्हारी तनख्वाह से देनी होगी, मेरा जरा दफ़तर की पार्टी में खर्च ज़्यादा हो गया

हम: मैं? मुझ से कैसे होगा?

 

४.  सासु माँ: बेटा, मैंने शालिनी आंटी से कह दिया है, कि दही भल्ले तो जैसे मेरी बहू बनाती है, कोई बना ही नहीं सकताअगले हफ्ते उनकी किटी पार्टी पर दही भल्ले मेरी ओर से होंगे

मैं: मुझ से कैसे होगा?

 

५.  अर्रे! रसोई में लाल मिर्च नहीं है!

हम: देखो जी, रसोई रसोई में १५० चीजें हैं, साबुन तेल आदि में और १०, बच्चों कि किताब कॉपी ४० और, ट्यूइशन का हिसाब, और, बच्चों के एक एक कपड़े, जूते, जुराब की हालत, मरम्मत, लोकेशन, एक एक होमवर्क का स्टैटस अपडेट, करंट लोकेशन, कुल मिला कर, ००- ०० चीजों का हिसाब, दिमाग ही दिमाग में रखना! मुझ से कैसे होगा?


६.  अगले हफ्ते दीदी के बेटे का बर्थडे हैबाजार जा कर ज़रा पार्टी का समान ला कर दीदी के घर पहुंचा देनाऔर हाँ, अपनी ओर से भी महंगा सा गिफ्ट ले आनालगना चाहिए कि मामा ने दिया है!

हम : पसंद दीदी की, भेंट तुम्हारी! मुझ से कैसे होगा?


७.  मम्मी, मम्मी, देखो ये सवाल नहीं रहा

हम: बेटा, स्कूल छोड़े उतने ही साल हमें हुए जितने पिता जी कोउन्हें याद नहीं है, वे पढ़ के समझ सकते हैंतो, मुझ से कैसे होगा?