तुम मुझे समझते क्या हो?
कोहेनूर।
तुम, और कोहेनूर, दोनों रोशनी से भरे हो।
दोनों मेरी किस्मत में नहीं हो।
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तुम मुझे समझते क्या हो?
कोहेनूर।
तुम, और कोहेनूर, दोनों रोशनी से भरे हो।
दोनों मेरी किस्मत में नहीं हो।
अच्छा है। कोई उम्मीद नहीं है, तो कोई दर्द भी नहीं होगा।
उम्मीद को खत्म करने से ठीक पहले जो दर्द होता है, उस से बढ़ कर भी कुछ है?
आपका बेटा कितना बड़ा है?
फलाने साल का।
मेरा भी कुछ इतना ही है। वो भी ऐसी ही बातें करता है, इसलिए पूछ लिया।
अच्छा। इस उम्र के बच्चे प्यार तो बहुत करते हैं, पर पढ़ाई में तंग बड़ा करते हैं। आपका बेटा पढ़ लेता है खुद से?
वो हॉस्टल में है। 3 साल से। घर में भरा पूरा परिवार है, पर वक़्त आने पर, कोई भी नहीं है।
एक ही बच्चा है?
हाँ जी। पता है, मैं बहुत बड़े परिवार से हूँ। मेरी 5 बहनें और 2 भाई हैं। सब के 2-2, 3-3 बच्चे हैं। बस मैं ही हूँ, जिसका एक ही बच्चा है।
क्यूंकि उन सब को घर मिले, आपको ससुराल।
तुम सब से हंस कर बात करती हो न?
हाँ।
मुझ से हंस कर मत किया करो
तो फिर कैसे करूं? रो कर?
शर्मा कर.
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तुम सब से हंस कर बात करते हो न?
हाँ.
मुझ से हंस कर मत बात किया करो।
तो फिर कैसे करूं?
कुछ अचकचेपन से, कुछ अनिश्चितता से।
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अपना ख्याल रखना। मैंने कुछ गलत कह दिया हो तो माफ करना।
किया।
क्या?
माफ किया।
मैंने क्या गलत कहा, ये भी बता दो।
तुमने कहा, "अपना ख्याल रखना।"
ये गलत था?
हाँ। सरासर गलत। ख्याल रखने की क्रिया बनी ही एक दूसरे के लिए है।
जब ख्याल रखने की जरूरत होती है, उस वक़्त कुव्वत नहीं होती। जब कुव्वत होती है, तब जरूरत कहाँ होती है?
सुनो...
कहो ...
कहने के लिए कुछ मिला कहाँ ?